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Gum ke maaro chalo besaharo chalo

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Gum ke maaro chalo besaharo chalo Lyrics

ग़म के मारों चलो बेसहारों चलो
बेकसों का सहारा बरैली में है।
एक आलम मुनव्वर है जिस जा़त से
हां वही माहपारा बरैली में है।

क़ादरी आसमां के दर्खशां क़मर
आला हज़रत के नामी गिरामी पिसर
जलवा ए गौ़स आता था जिसमें नज़र
वोह रज़ा का दुलारा बरैली में है।

डूबने वालों ज़ुल्मत के तूफ़ान में
मुफ्ती ए आज़मे हिंद का नाम लो
नूर वाला बनाएंगे नूरी मियां
नूर का एक मीनारा बरैली में है।

जिससे है अहले सुन्नत की खेती हरी
जिसको कहते हैं अख़्तर रज़ा अज़हरी
वारिसे इल्मे अहमद रज़ा जो बना
फख़रे अज़हर हमारा बरैली में है।

मुफ्ती ए आज़मे हिंद के जानशीं 
जिनका सानी ज़माने में मिलता नहीं
चांद की तलअतें जिसपे कु़र्बान हों
ऐसा अख़्तर हमारा बरैली में है।

जलवा गर हैं जहां शाह अहमद रज़ा
मुफ्ती ए आज़मे हिंद, अख़्तर रज़ा
ग़ौर से देखिए तो नज़र आएगा
चांद सूरज सितारा बरैली में है।

मोहम्मद अली फ़ैजी
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منقبت تاج الشریعہ رحمۃ اللہ علیہ

غم کے ماروں چلو بے سہاروں چلو
بیکسوں کا سہارا بریلی میں ہے
ایک عالم منور جس ذات سے
ہاں وہی ماہپارا بریلی میں ہے

قادری آسماں کے درخشاں قمر
اعلیٰ حضرت کے نامی گرامی پسر
جلوۓ غوث آتا تھا جس میں نظر
وہ رضا کا دلارا بریلی میں ہے

ڈوبنے والوں ظلمت کے طوفان میں
مفتی اعظم ہند کا نام لو
نور والا بنائیں گے نوری میاں
نور کا ایک منارہ بریلی میں ہے

جس سے ہے اہلسنّت کی کھیتی ہری
جس کو کہتے ہیں اختر رضا ازہری
وارثِ علمِ احمد رضا جو بنا
فخرِ ازہر ہمارا بریلی میں ہے

مفتی اعظم ہند کے جانشیں
جن کا ثانی زمانے میں ملتا نہیں
چاند کی طلعتیں جس پہ قربان ہوں
ایسا اختر ہمارا بریلی میں ہے

جلوہ گر ہیں جہاں شاہ احمد رضا
مفتی اعظم ہند اختر رضا
غور سے دیکھیے تو نظر آئے گا
چاند سورج ستارا بریلی میں ہے

محمد علی فیؔضی

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